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बचपन : धूप में खिलता इंद्रधनुष
Writer Profile
~By Srabani ✍🏻
Writer | U Writer
सपनों का आँगन था, गुजरा हुआ कल था, क्यूंकि वो मेरा बचपन था || चले गए वह सुनेहरे दिन, जब स्कूल जाने से पहले पीते थे हम bournvita, और घर आने के बाद रसना मीठा- मीठा || वो टीवी के सामने यूँ बैठना दिन-रात, और देखना विक्रम-वेताल और शरारत || वो टीवी में जादू को सच मानना, वो रूह-अफजा पिने की तमन्ना || याद आए हर पल, यह जानकर भी नहीं आएंगे वो बीते हुए कल || कैडबरी bytes ka टेस्ट किसी शाही टुकड़ा से कम नहीं, वो kinder joy mein toy मिलने की खुशी, वो complan की खुश्बू || शाम को कुछ मिले या ना मिले पर Cheetos ka मिलना था compulsory, क्यूंकि यहीं है मुझे necessary, बिना इस चॉकलेट के है जन्मदिन अधूरा,और वो है melody.... चाचा चौधरी की वो किताब पढ़ के चेहरे पर आ जाए मुस्कुराहट, पर डर लग जाए हर किसी को अगर देख ले वो रात को आहट ||
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