Poem Cover
डर को मात दे और आगे बढ़ता जा
Writer Profile
~By Gaurav ✍🏻
Writer | U Writer
ज़िंदगी अपनी-अपनी, उसको जीने का तरीका अपना-अपना। कैसे उज्ज्वल और खुशहाल हो जीवन हमारा, बस यही एक रहता है हमारा सपना। दिन बीत रहा है, रातें कट रही हैं, फिर भी उलझन में बंधे हैं हम। क्या करें, कैसे करें, कहाँ करें— ये सवालों का पहाड़ ही नहीं हो रहा कम। दिल कह रहा है इस पल को तू जी ले ज़रा, और दिमाग कह रहा है कुछ नहीं करेगा तो कौन बनेगा तेरा सहारा। दोस्त तो बहुत हैं मेरे, पर बात होती बहुत कम। अब उन्हें क्या बताऊँ अपने हाल का, तो कहते हैं वो घमंड रखता है हर दम। अपनी ज़िंदगी में मस्त रहता हूँ मैं, ना किसी की ज़िंदगी में दखल देता हूँ मैं। दखल दोगे तो बढ़ेगी परेशानी, और डर रहेगा मिटने को दोस्ती की निशानी। अपनी ज़िंदगी का अलग ही उसूल है मेरा, जहाँ बन जाते हैं हम लोगों के आगे अभिमानी। पर कोई ग़म नहीं है इस बात का, जिसमें तैयारी है हम देने को दोस्ती, रिश्ते, प्यार—सब में क़ुर्बानी। माना कि इस वजह से मैंने खोया है बहुतों को, पर कोई बात नहीं। बातें तो होती रहेंगी, वक़्त भी चलता रहेगा। अगर आगे का न सोचा तू, पूरी ज़िंदगी रोता रहेगा। बस कुछ दरमियान हैं मुझे खुद पर और अपने फ़ैसले पर, जहाँ ऊँचाइयों की सीढ़ी चढ़ता जाऊँगा। आए अगर कोई भी परेशानी, खुशी-खुशी झेल जाऊँगा।
Tags: #Prose #Utkal #UWriter