✍🏻 ~ Shrutirekha
Writer | U Writer
क्यों छोड़े अपने संघर्ष, क्यों रोएँ लेकर अपनी फूटी किस्मत?
क्यों मान जाएँ हार, बिना करे मेहनत?
हार–जीत क्या चीज़ है?
अगर सच्चाई है दिल में, तो हम हारे नहीं।
और अगर मन में बेईमानी हो,
तो जीत कर भी हम जीते नहीं।
युद्ध ही हमारा कर्तव्य है,
संघर्ष ही हमारी पहचान।
हार के बाद उठना सीख लिया जिसने,
उसका ही है पूरा आसमान।
तू अपने आप की संधान कर,
अपने गुण की पहचान कर।
ये आखिर इम्तिहान तो नहीं,
यहाँ हर पल लड़ना है।
करनी ने हैं नई–नई गलतियाँ,
हर पल कुछ नया सीखना है।
ये नहीं तो कुछ और सही,
कुछ और नहीं तो कुछ और सही,
कुछ तो कर ही लेंगे ज़िंदगी में,
अगर हो जीतने की आग मन में।
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